अघोर का अर्थ है अ+घोर यानी जो घोर नहीं हो सहज और सरल हो भयानक ना हो जिसमें कोई भेदभाव नहीं हो। अघोर बनने की पहली शर्त है अपने मन में दया हो करुणा हो किसी से भी भेदभाव नही हो। भूत ,भविष्य , वर्तमान की कोई भी फ़िक्र ना हो अघोर क्रिया इंसान को सहज बनाती है। मूलत: अघोरी उसे कहते हैं जो शमशान जैसी भयावह और विचित्र जगह पर भी उसी सहजता से रह सके जैसे लोग घरों में रहते हैं। वैसे ही अघोरि कहि भी निवास कर सकते है ये सर्दी गर्मी बरसात की बिल्कुल भी फ़िक्र नही करते है । ये अपने शरीर को कठोर तपस्या से किसी भी माहौल मै रहने के किये तैयार कर लेते है । अघोरि हिमालय की गोद मैं अपना जीवन निकाल देते है अघोर विद्या के लिए मुख्यत तारापीठ , कामख्या पिठ , रजरप्पापीठ, चक्रतीर्थ ये अघोर साध्ना के लिये पूरे विशव में माना जाता है । तारापीठ तारापीठ कोलकाता की तारापीठ धाम की खासियत यहां का महाश्मशान है । तारापीठ (शक्तिपीठ) अघोर तांत्रिकों का तीर्थ कही जाती है । यहाँ के समसान में हजारों की संख्या में अघोर तांत्रिक मिल जाएंगे । तंत्र मंत्र की साधना टोना टोटका की पूजा अर्चना पुरी की जाती है यहाँ पर ये शव साधना के लिए जानी-मानी जगह है जहां की आराधना पीठ के निकट स्थित श्मशान में हवन किए बगैर पूरी नहीं मानी जाती । माँ तारापीठ की अघोर साधना को अघोर कर्म और धर्म से मान कर चलते है ।। कामख्या पीठ. कामख्या पीठ असम राज्य की गुवाहाटी मै माँ कामख्या का शक्ति पीठ स्थित है देवपुराण मै कामख्या शक्ति पीठ को सर्वोच्च माना जाता है रजरपापीठ रजरप्पा में छिन्नमस्ता देवी का स्थान है चक्रतीर्थ। मध्यप्रदेश के उज्जैन में चक्र तीर्थ स्थान है ये तीर्थ अघोरियो के लिए बहुत ही प्रसिद्ध स्थान है । यहाँ पर ये अपनी तपस्या मै ली
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